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पानी की अपनी मर्जी है साहब…

पानी ठंडा हो तो जमा कर दे, गर्म हो तो जला दे।
ज़्यादा हो तो डुबो दे, कम हो तो प्यास से मार दे।
मैला हो तो बीमारी दे, आँखों में हो तो आँसू बन ए,
और शरीर से बहे तो मेहनत की बूंद कहलाए।

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