कहाँ गए वो लोग…

, showing two old brothers reconciling after a small quarrel, sitting together near a mud house courtyard. In the background, women are cooking on a traditional clay chulha with firewood, and a neighbor is taking fire from their hearth. Nearby, an old man is pounding rice in a wooden mortar with a pestle, while children peek curiously over a mud wall.

शशि त्यागी, अमरोहा

जाती जब बात मान की,एक हुआ करते थे,
कहाँ गए वो लोग जो,पश्चाताप किया करते थे।

कहाँ गए वो भ्रात,जो आपस में लड़ते-मरते थे,
मातृ प्रेम में पगे, तुरत ही मेल किया करते थे।
घड़ी-दो-घड़ी रूठ के वापिस घर आया करते थे,
कहाँ गए वो लोग,जो पश्चाताप किया करते थे।

हो जाती दीवार खड़ी,पर उचक-उचक तकते थे,
चूल्हा जलता देख,आग फिर माँग लिया करते थे।
प्रायश्चित करने को वो,दिन-रात तपा करते थे
कहाँ गए वो लोग,जो पश्चाताप किया करते थे।

काली रातों में जब गीदड़,गुर्राया करते थे,
तनिक हुई आवाज़ उधर,वो इधर जगा करते थे।
भरे गाँव के खुद ही प्रहरी, बन जाया करते थे,
कहाँ गए वो लोग,जो पश्चाताप किया करते थे।

धान ओखली में भर तब,मूसल से कुटा करते थे,
छाज फटक अनाज से थोथा,दूर किया करते थे।
आठों पहर झोली भर-भर,आशीष दिया करते थे,
कहाँ गए वो लोग,जो पश्चाताप किया करते थे।

ब्याह में नरसिंह झाँज बजाते,आ जाया करते थे।
सवा पहर सोना बरसा कर,भात भरा करते थे।
हर बेटी को गाँव की बेटी,बतलाया करते थे,
कहाँ गए वो लोग,जो पश्चाताप किया करते थे।

2 thoughts on “कहाँ गए वो लोग…

    1. अतीत के टुकड़ों को बहुत ही सुंदर ढंग से संजोया है 💐💐

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