
सवितासिंह मीरा, प्रसिद्ध कवयित्री,जमशेदपुर
पढ़ें कविता हम हिंदी में,
लिखें कविता हम हिंदी में,
हमारी भावनाएँ झरकर,
झरे धारा भी हिंदी में।
सरल, कोमल, विमल, निर्मल,
लगे गंगा नदी पावन।
दिवस हिंदी के शुभ दिन पर,
मिले सम्मान हिंदी में।
प्रथम बोली शिशु की जो
कहे वह माँ भी हिंदी में,
करे जो प्रेम मीरा तो
बुलाती कृष्ण हिंदी में।
हमारे वेद, उपनिषद,
मिला जो ज्ञान गीता का,
सजा कर थाल पूजा का,
भजन, अर्चन भी हिंदी में।