परवरिश…

क्या है परवरिश
यूँ
हमसे ही बीजांकुरित,
संतान रूपी पौध को
यथार्थ के धरातल पर
प्यार, स्नेह और संस्कार से
अनवरत सिंचित कर…..
समय-समय पर उचित
मार्गदर्शन की निराई – गुडाई
करते हुए पोषित कर…..
हम भविष्य में इस पौध को
एक संवेदनशील, जिम्मेदार
फलदाई सक्षम वृक्ष स्वरूप में
अवश्य पा सकते हैं न…..!

उषा शर्मा, प्रसिद्ध कवयित्री, जामनगर

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