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सराफा चौपाटी के खिलाफ व्यापारी एकजुट

एक सितंबर से एक भी दुकान नहीं लगने देंगे, अन्यत्र शिफ्ट करें

दस दिन बाद बड़ा-छोटा सराफा में चौपाटी लग पाएगी या नहीं इसे लेकर रस्साकशी की स्थिति बनना तय है। भाजपा को भी राजनीति करना है, पेंच यह भी फंस रहा है कि सराफा क्षेत्र विधानसभा क्षेत्र क्रमांक चार का हिस्सा है और भाजपा की विधायक मालिनी गौड़ को सराफा चौपाटी के दुकानदार अपनी परेशानी एकाधिक बार बता चुके हैं।महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी चार नंबर क्षेत्र के निवासी हैं वो भी इस मामले में अपना रुतबा कम नहीं होने देना चाहते हैं । जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर की रिपोर्ट को मान्य करते हुए नगर निगम छह दर्जन से अधिक दुकानदारों को अनुमति का फैसला कर चुका है।इन सबके बीच सराफा एसोसिएशन ने तय कर लिया है कि चाहे धरना देना पड़े या हड़ताल करना पड़े, 80 तो क्या एक भी दुकान एक सितंबर से नहीं लगने देंगे, पूरी चौपाटी को अन्यत्र शिफ्ट करे प्रशासन ।
सराफा चौपाटी को लेकर यह विवादास्पद स्थिति इसलिए बनी है कि चाट-व्यंजनों की दुकानें सराफा के साथ ही पीपली बाजार से लेकर बजाजखाना चौक तक फैल गई हैं। जबकि रात ढलते ही खान-पान के ये ठिये राजबाड़ा, खजूरी बाजार तक पसर जाते हैं। सराफा चौपाटी की इन दुकानों पर हर 8-15 दिन में कभी ग्राहकों से दुर्व्यवहार, तो कभी छेड़छाड़ तो कभी दुकानदार द्वारा ग्राहक परिवार से मारपीट जैसी घटनाएं भी होती रही हैं।आए दिन होने वाली ऐसी घटनाओं में सराफा थाना स्टॉफ का चौपाटी दुकानदारों के पक्ष में झुकाव भी चर्चा में रहा है।
▪️पीएम की तारीफ से चौपाटी अधिक चर्चा में आई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्लोबल इंवेस्टर समिट के दौरान इंदौर आए थे, हमेशा की तरह अपने भाषण को लोकल टच देने के लिए इंदौर के इस दौर को याद करते हुए सराफा चौपाटी और छप्पन दुकान का जिक्र किया था। अंबानी परिवार में हुए विवाह के दौरान चौपाटी के कुछ दुकानदारों को एंटेलिया (मुंबई) में उनके व्यंजनों का मेहमानों को स्वाद चखाने के लिए आमंत्रित करने से सराफा चौपाटी की पहचान और बढ़ गई थी।

▪️इसलिए है सराफा एसोसिएशन का विरोध
सराफा में दशकों पूर्व करीब 80 दुकानें लगती थी। इनकी संख्या बढ़ कर 170 से अधिक हो गई है। शाम सात बजे से चौपाटी दुकानदार अपने ठेले सोना-चांदी व्यापारियों की दुकानों के आगे लगाना शुरु कर देते हैं।
एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकम सोनी का कहना है सदस्य लंबे समय से शिकायत कर रहे थे। नगर निगम ने रिपोर्ट तैयार कराई लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। इसकी क्या गारंटी कि 80 दुकानों के बाद फिर से दुकानों की संख्या नहीं बढ़ेगी।एसोसिएशन ने तय किया है कि एक भी दुकान नहीं लगने देंगे। एक बार धरना दे चुके हैं, अब तय कर लिया है कि एक सितंबर से एक भी दुकान नहीं लगने देंगे। जिन सराफा दुकानदारों ने अपने ओटले इन दुकानदारों को 10-15 हजार रु महीने में किराए पर दे रखे हैं, वो सब भी एसोसिएशन के निर्णय से सहमत हैं। चाहे हड़ताल करना पड़े या सराफा बंद करना पड़े अब रात में चौपाटी की एक भी दुकान नहीं लगने देंगे।प्रशासन को भी अवगत करा रहे हैं। एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अविनाश आनंद का कहना है चौपाटी यहां से हटाना ही चाहिए लेकिन इन दुकानदारों के पेट पर लात भी ना मारें।चौपाटी की इन दुकानों को रिवर साइड रोड पर जगह दी जा सकती है, वहां पार्किंग की भी पर्याप्त व्यवस्था है।

▪️जनकार्य समिति अध्यक्ष की रिपोर्ट
नगर निगम जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में 80 दुकानों को पारंपरिक चौपाटी माना है। इन दुकानों को यहां यथावत रखने की अनुशंसा की है। अध्यक्ष राठौर का कहना है बाकी जितनी भी दुकानें हैं वो तो सराफा दुकानदारों ने किराए के लालच में दे रखी हैं तो इसमें निगम की सहमति नहीं है। यह तो सराफा एसोसिएशन का दायित्व है कि कितने नये दुकानदार वहां रात में सामान बेच रहे हैं।

▪️पारंपरिक व्यंजनों पर नया चटखारा हावी
सराफा चौपाटी करीब 95 साल से संचालित हो रही है। जो 80 दुकानें चिह्नित की हैं उन पर पारंपरिक व्यंजन रबड़ी, गुलाब जामुन, मालपुए, घेवर, छोले टिकिया, दहीबड़ा, पानीपतासे आदि से पहचान थी। खुद चाटचौपाटी के दुकानदार परेशान हैं नित नये ठेले लगने से। नाम तो चौपाटी जरूर है लेकिन अब यहां कपड़े, खिलौने, मोबाइल कवर से लेकर चाइनीज फूड, मोमोज, पान, आलू टेस्टर आदि की दुकानें भी लग रही हैं। ऐसी अधिकांश दुकानें उन लोगों की हैं जो किसी न किसी प्रभावी नेता से जुड़े हैं।

▪️हम अभी सराफा एसो का रुख देख रहे हैं
सराफा चौपाटी एसोसिएशन के अध्यक्ष राम गुप्ता का कहना है चाहे तब हो या अब चौपाटी की दुकानें सराफा दुकानदारों की मेहरबानी से ही लगी हैं। हम एसोसिएशन को सहयोग करते रहे हैं, अभी भी उनके रुख का इंतजार कर रहे हैं। जो सदस्य नहीं हैं उनके खिलाफ एक्शन से एतराज भी नहीं है क्योंकि चौपाटी की पहचान देश-विदेश तक है, अनुशासन होना चाहिए।हम महापौर और क्षेत्रीय विधायक से भी मिलेंगे।ताकि सम्मानजनक हल निकले और चौपाटी दुकानदारों की रोजी रोटी भी प्रभावित नहीं हो।

इंदौर से कीर्ति राणा की रिपोर्ट

One thought on “सराफा चौपाटी के खिलाफ व्यापारी एकजुट

  1. हर चीज के दो पहलू होते हैं अच्छा और बुरा

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