वो साल अच्छा था

ये हाल अच्छा है न वो हाल अच्छा था
इस साल से कह दो कि वो साल अच्छा था!

बड़े मुआमले हैं सुनने सुनाने में,
गुफ़्तगू को घर का दीवाल अच्छा था।

न ये हाल अच्छा है न वो हाल अच्छा था
इस साल से कह दो कि वो साल अच्छा था !

इफ़रात मिली मोहब्बत ,रखती कहाँ!
जेब ही फटी थी सो तंग हाल अच्छा था।

तू उसका था फिर, मेरा हुआ कैसे !
बेतक़ल्लुफ़ी में, ये सवाल अच्छा था ।

सुनीता सिंह, कवयित्री, कोलकाता

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