
ममता सिंह ‘चित्त’
सजी दियों से थाली हो, खुशियों भरी दिवाली हो,
हर आँगन में दीपक दमके, ये शाम उजालों वाली हो।
अम्मा ने घर चमकाया, रंग-रोगन से खूब सजाया,
कोना घर का ऐसे महके, जैसे सीता की फुलवारी हो।
फुलझड़ियों से तारे झरते, खुशियों से धरा ये दमके,
मुन्नी-बबलू ऐसे ताकें, जैसे अवध की खुशियाली हो।
गलियों में चहल-पहल है, उज्ज्वल कपड़ों में हर जन है,
पर्दे घर के ऐसे झूमें, जैसे नीरद की अंगड़ाई हो।
बर्फी, लड्डू, खील-बताशे, थाली में रह-रह मुस्काएँ,
संयम से चलते परिवारों को मेरी खूब बधाई हो।
