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सरकारी नौकरी मांगते मदन के सामने बैठे नेता जी, राजनीतिक व्यंग्य लघुकथा ‘डिग्री’ का दृश्य डिग्री – हिंदी व्यंग्य लघुकथा
nirja krishna writer

नीरजा कृष्णा, पटना

मंत्री जी उसके कस्बे में दौरे पर आए हुए थे। मदन उनका पक्का भक्त और विश्वासी था। वो सुबह से उनके स्वागत के प्रबंध में लगा हुआ था। आज हिम्मत करके राधा बोल ही दी,”नेता जी के लिए इतना करते हो, आगे पीछे लगे रहते हो। इस बार कुछ पक्की नौकरी के लिए बात करो ना। वो तुम्हारी बात नहीं टालेंगे।”

बात उसे भी जम गई और आज उसने नेता जी से बात करने की ठान ही ली थी। रात को भोजन के उपरांत उनके चरण दबाते हुए उसे मौका मिल गया और बोल दिया,”मालिक, कोई पक्की नौकरी लगवा दीजिए तो बड़ी कृपा होगी। बंधा पैसा मिलेगा तो बाल बच्चों की पढ़ाई लिखाई आदि में निश्चिंती रहेगी।”

वो बिना सोचे समझे बोल पड़े,”मेरी सेवा में लग जा। मेरा बॉडीगार्ड बन जा। चालीस पचास हजार तो तेरे बन ही जाएँगे।”

वो खुश हो गया पर तुरंत बोला,”ये तो प्राइवेट काम है। कोई भी छोटा मोटा पक्का सरकारी काम पकड़वा दीजिए।”

नेता जी सोच में पड़ गए और बोले,”पर उसके लिए तो डिग्री बड़ी चाहिए।”

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