gulmohar

बोगनवेलिया

सावन की बारिश में भीगा लाल बोगनवेलिया और प्रेम की यादों को दर्शाती हिंदी कविता भीगे बोगनवेलिया की पंखुड़ियों में आज भी महकती है अधूरी मोहब्बत की याद.

रीता मिश्रा तिवारी, भागलपुर

घटाटोप सावन की बारिश में,
तुम्हारी यादों में भीगी मिलूँगी मैं
उसी लाल बोगनवेलिया के नीचे..!

वही बोगनवेलिया, जो
बादलों को देख मुस्कुराकर कहता है
इश्क़ में दूरियाँ चाहे जितनी हों,
वफ़ा की महक कभी कम नहीं होती..!

घनघोर झमाझम बारिश में,
काँटों के बीच भीगी लाल पंखुड़ियों को
चूमकर गिरती हैं बूँदें, जैसे
तुम्हारा ख़याल रूह को छू जाता है..!

आसमान से बरसती बूँदें और
शाखों पर भीगता बोगनवेलिया,
मानो कायनात ने आज हमारी
अधूरी दास्तान लिख दी हो..!

इन रचनाओं को भी पढ़ें-
“मन अमराई महकी रे”
बोगनवेलिया
यादों की गलियों में लौट चलें
ऑर्गेनिक कहानी
सुकून
काश तुम मेरी खामोशी पढ़ पाते…
खुद से मिलने की तमन्ना

5 thoughts on “बोगनवेलिया”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *