सच्चा सारथी

कठिन समय में अपनी सहेली का हाथ थामकर हौसला देती एक महिला

चन्द्रवती दीक्षित करनाल (हरियाणा)

2011 की स्वर्णिम भोर, प्रातः 9 बजे का शुभ समय। फूलों की भाँति खिलता हुआ एक कोमल चेहरा संजय नगर, करनाल की पाठशाला में प्रवेश करता है। प्रथम मुलाकात में ही जैसे जन्मों का पावन बंधन बंध गया। तब से लेकर आज तक अध्यापिका हेमलता ने सच्चे मित्र की कसौटी पर खरा उतरकर हमारे जीवन में हर पल सच्चे दोस्त बनकर चार-चाँद लगा दिए।

साधारण परिवार में पले-बढ़े होने के कारण हम जीवन की व्यवहारिकता में इतने प्रवीण नहीं थे। घर में सबसे छोटे होने के कारण और अत्यधिक प्रेम मिलने से हम जल्दी गुस्सा कर जाते थे। हेमा जी ने स्कूल और घर, दोनों की पृष्ठभूमि में हमें समय-समय पर प्रेमपूर्वक समझाकर जीवन-नैया की डगर पर सही कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। आवश्यकता पड़ने पर आर्थिक स्तर पर भी बड़े दिल से सहायता कर हमारा दिल जीत लिया।

हमारी माताश्री के देहांत के बाद अत्यधिक शोक के कारण हमारी मानसिक स्थिति एकदम डोल गई। संपूर्ण इलाज के बावजूद हम ठीक नहीं हो पा रहे थे। तभी अचानक मन ने हमें हेमा जी से मिलने के लिए इतना मजबूर किया कि उन्हें तुरंत आना पड़ा।

“मित्र वही जो समय पर काम आए,
सच्ची मित्रता से आनंद छा जाए।”

तबादला होने के बाद भी हमारी सच्ची सहेली तुरंत हमारे पास पहुँची। उन्हें देखते ही हमारे दिल के भाव उमड़ पड़े। जो भी दुविधा और कष्ट था, वह स्वयं बाहर आ गया। आत्मा शांत हुई, मानो सारे दुःखों का निवारण हो गया। जान में जान आई। परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा।

कृष्ण की भाँति हेमा जी ने अपनी सूझबूझ और संयमित प्रेरणा से हमारे कष्टदायी पलों को सदाबहार बना दिया।

इन्हीं प्रेरणादायी पलों से प्रेरित होकर हम आज जिंदगी के सुकून भरे लम्हों का आनंद उठा रहे हैं तथा अपनी सच्ची जीवन-सहेली हेमा और ईश्वर का तहेदिल से गुणगान कर रहे हैं।

साथ ही प्रभु से यही प्रार्थना करते हैं कि हेमा जैसे सच्चे हितैषी मित्र सभी को मिलें, क्योंकि दोस्ती से बढ़कर कोई रिश्ता नहीं होता। मन हर क्षण यही गुणगान करता है-

सच्चा मित्र कर्मों का वरदान,
जगाए मन में सच्चा स्वाभिमान।

पावन दोस्ती हर घाव मिटाए,
यह सर्वत्र खुशी के फूल खिलाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *