मेरा सच्चा दोस्त

फ्रेंडशिप डे पर सहेलियों की भावनात्मक तस्वीर

भारती सोनी, उज्जैन

वैसे तो हम सबके जीवन में बहुत से मित्र होते हैं, लेकिन उनमें से कुछ मित्र बहुत खास होते हैं। वे कृष्ण जैसे होते हैं—जो सुदामा की एक आवाज़ पर नंगे पैर दौड़ पड़ते हैं, द्रौपदी की लाज बचाने वाले बन जाते हैं और अर्जुन के सारथी बनकर जीवन की हर कठिन राह में साथ निभाते हैं।ऐसे ही मेरे जीवन में भी तीन मित्र हैं, जो मेरे लिए बेहद खास हैं।

मेरी पहली मित्र अंजली है। हमारी दोस्ती बचपन से लेकर आज तक बनी हुई है। हम स्कूल के दिनों से साथ हैं। आज भले ही हमारे बीच मीलों की दूरियाँ हों, लेकिन हमारी दोस्ती में कभी कोई दूरी नहीं आई। उसकी एक आवाज़ पर मैं उसके लिए और मेरी एक पुकार पर वह मेरे लिए हमेशा खड़ी रहती है। जीवन में अनेक सुख-दुख आए, लेकिन उसके साथ होने से मुझे कभी अकेलापन या असहायता महसूस नहीं हुई।

मेरी दूसरी मित्र मनीषा है, जो मेरी भाभी भी हैं। हमारी दोस्ती अपनी सिल्वर जुबली मना चुकी है। फोन पर मेरे सिर्फ “राधे-राधे” कहने भर से वह समझ जाती हैं कि मैं परेशान हूँ, बहुत खुश हूँ या मेरे मन में कोई और बात चल रही है। बिना कुछ कहे मन की बात समझ लेने वाली ऐसी प्यारी दोस्त हर किसी के नसीब में नहीं होती।

मेरी बेटी की शादी की खरीदारी हो या शादी की अन्य तैयारियाँ, मुझे उन्हें कुछ कहने की भी ज़रूरत नहीं पड़ी। उन्होंने हर जिम्मेदारी को अपनेपन से निभाया। बेटी की विदाई के बाद उन्होंने जिस तरह मेरा ध्यान रखा, उसे शब्दों में पिरो पाना मेरे लिए संभव नहीं है।और यदि मैं अपनी तीसरी मित्र कविता का ज़िक्र न करूँ, तो यह लेख अधूरा रह जाएगा।

हमारी दोस्ती की शुरुआत हमारे बच्चों के कारण हुई थी, लेकिन समय के साथ यह रिश्ता इतना गहरा हो गया कि आज यह हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। करीब छह-सात वर्ष पहले मेरे जीवन में एक ऐसी कठिन परिस्थिति आई थी कि मैं समझ नहीं पा रही थी कि क्या करूँ। उस समय मैं अपने परिवार से भी कुछ दूर थी। ऐसे कठिन समय में कविता भाभी और भैया ने मेरा जिस तरह साथ दिया, वह मैं कभी नहीं भूल सकती। कविता भाभी ने चार-पाँच दिन तक अपने सारे काम छोड़कर सिर्फ मुझे संभाला। उनका वह स्नेह, अपनापन और साथ आज भी मेरे दिल में सुरक्षित है।

आज हम दूर रहते हुए भी दिल से हमेशा एक-दूसरे के बहुत करीब हैं।दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है, जिसे स्वयं भगवान ने बनाया है। यह हर स्वार्थ से परे होता है। सुख-दुख, अमीरी-गरीबी और हर भेदभाव से ऊपर उठकर यह रिश्ता आत्माओं को जोड़ता है। यही रिश्ता हमारे मन को सच्ची खुशी देता है। जब दुनिया की भीड़ में इंसान खुद को अकेला महसूस करता है, तो अनायास ही उसे अपने दोस्त की याद आती है। कभी बिना किसी वजह के घंटों बातें करना, सड़कों पर हाथों में हाथ डालकर यूँ ही घूमना, बेसुरी आवाज़ में गाने गाना और छोटी-छोटी खुशियों को साथ जीना—यही तो दोस्ती की सबसे खूबसूरत पहचान है।

सच ही कहा गया है कि एक सच्चा दोस्त वही होता है, जो बारिश में भी आपके आँसू पहचान ले।

मैं स्वयं को बहुत भाग्यशाली मानती हूँ कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से मुझे ऐसे सच्चे और निस्वार्थ मित्र मिले, जिन्होंने हर मोड़ पर मेरा हाथ थामा। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करती हूँ कि यह अनमोल रिश्ता जीवनभर यूँ ही बना रहे।

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