दो दिलों की खूबसूरत दोस्ती

दो सखियों के बीच गहरी दोस्ती और आत्मीय रिश्ते को दर्शाता दृश्य

नीलम पेड़ीवाल “विहाँगी” जमशेदपुर, झारखंड

कहते हैं कि जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं, जिन्हें शब्दों में पूरी तरह बयां करना आसान नहीं होता। वे रिश्ते किसी पहचान, किसी स्वार्थ या किसी मजबूरी से नहीं बनते, बल्कि दो दिलों के बीच की उस अनकही समझ से जन्म लेते हैं, जहाँ बिना कहे भी बहुत कुछ समझ लिया जाता है। ऐसा ही एक खूबसूरत रिश्ता मेरी जिंदगी में 23 सितंबर 2023 को जुड़ा, जो आज मेरे लिए बेहद खास और अनमोल बन चुका है।

उस दिन तुलसी भवन में मेरी मुलाकात पूनम जी से हुई थी। पहली मुलाकात भले ही एक सामान्य परिचय के रूप में हुई थी, लेकिन उनकी सहजता, सरलता और मिलनसार स्वभाव ने मेरे मन को छू लिया। उनकी बातों में एक ऐसा अपनापन था, जैसे बरसों से कोई अपना मेरे सामने बैठा हो। धीरे-धीरे हमारी बातचीत बढ़ती गई और कब यह परिचय एक गहरी दोस्ती में बदल गया, पता ही नहीं चला।

पूनम जी के व्यक्तित्व में एक अलग ही आकर्षण है। उनकी मुस्कान में आत्मीयता है और उनकी बातों में सकारात्मकता। शायद यही कारण है कि जो भी उनसे मिलता है, उनका अपना बन जाता है। हम दोनों के विचारों में समानता है, हमारी सोच एक-दूसरे को समझती है और जीवन के प्रति हमारा नजरिया भी काफी हद तक मिलता-जुलता है।

हम दोनों ही शिक्षण कार्य से जुड़े हुए हैं। शायद इसी कारण हमारे भीतर दूसरों के जीवन में कुछ अच्छा करने की भावना भी समान है। पूनम जी केवल एक अच्छी शिक्षिका ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील लेखिका भी हैं। वे विभिन्न विधाओं में अपनी लेखनी के माध्यम से भावनाओं को अभिव्यक्त करती हैं। उनकी मेहनत, लगन और किसी भी कार्य को पूरी निष्ठा से पूरा करने की आदत मुझे हमेशा प्रेरित करती है।

दिनभर की जिम्मेदारियों और व्यस्तताओं के बाद जब रात के शांत समय में उनसे बातचीत होती है, तो मन को एक अद्भुत शांति मिलती है। ऐसा लगता है जैसे दिनभर की थकान कहीं दूर चली गई हो। उनके साथ बात करते हुए कभी महसूस नहीं होता कि हम अलग-अलग हैं। मन की छोटी-बड़ी हर बात, खुशियाँ, परेशानियाँ और अनुभव हम एक-दूसरे से साझा करते हैं।

जीवन में हर व्यक्ति को एक ऐसे साथी की जरूरत होती है, जिसके सामने वह बिना किसी डर और संकोच के अपने मन की बात कह सके। पूनम जी मेरे लिए वही विश्वास और अपनापन लेकर आई हैं। उनकी मौजूदगी यह एहसास कराती है कि इस दुनिया में आज भी ऐसे रिश्ते मौजूद हैं, जहाँ अपेक्षाओं से ज्यादा भावनाओं का महत्व होता है।

हम दोनों की कोशिश रहती है कि अपने ज्ञान, अपने व्यवहार और अपने छोटे-छोटे प्रयासों से किसी के जीवन में थोड़ी-सी खुशी और अच्छाई जोड़ सकें। हमारे रिश्ते में न कोई स्वार्थ है, न कोई दिखावा। बस एक-दूसरे के प्रति सम्मान, विश्वास और सच्ची आत्मीयता है।

आज के समय में जब रिश्ते बनाना और उन्हें निभाना चुनौती बनता जा रहा है, वहाँ ऐसा रिश्ता मिलना सचमुच सौभाग्य की बात है। कुछ लोग जीवन में बहुत देर के लिए नहीं आते, लेकिन जितने समय के लिए आते हैं, उतनी गहरी छाप छोड़ जाते हैं। पूनम जी का साथ मेरे जीवन में ऐसा ही एक सुंदर अध्याय है।

मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूँ कि ईश्वर ने मुझे पूनम सिंह जैसी सखी का साथ दिया। वह मेरे लिए केवल एक मित्र नहीं हैं, बल्कि मेरे जीवन का वह अनमोल उपहार हैं, जिसकी कीमत किसी भी शब्द या वस्तु से नहीं लगाई जा सकती।

मेरी यही प्रार्थना है कि हमारी यह दोस्ती हमेशा यूँ ही बनी रहे। समय बदलता रहे, परिस्थितियाँ बदलती रहें, लेकिन हमारे बीच का यह विश्वास, यह अपनापन और यह आत्मीय रिश्ता हमेशा पहले जैसा ही खूबसूरत बना रहे।

क्योंकि कुछ रिश्ते जीवन में बनाए नहीं जाते…
वे तो ईश्वर की ओर से मिले हुए अनमोल उपहार होते हैं।

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