
बरेली (मध्यप्रदेश ) से महेश प्रसाद शर्मा की रिपोर्ट
पुणे। माँ सरस्वती राष्ट्रीय काव्य मंच भारत एवं संस्था “एक प्रयास भारत” के संयुक्त तत्वावधान में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर एक भव्य ऑनलाइन काव्य एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन पंडित महेश शर्मा ने किया। देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कवियों और रचनाकारों ने अपनी ओजपूर्ण एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से कारगिल के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ वीणापाणि की वंदना से हुआ। संयोजक पंडित महेश शर्मा ने कारगिल विजय दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने दुर्गम हिमालयी चोटियों पर तिरंगे की आन, बान और शान के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने अपने अदम्य साहस से यह सिद्ध किया कि भारत की ओर उठने वाली हर बुरी नजर का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
पटल संरक्षक एवं वरिष्ठ साहित्यकार महेंद्र माणिक ने अपनी ओजस्वी रचना से गोष्ठी का प्रभावशाली शुभारंभ किया। मुख्य अतिथि डॉ. प्रमोद आदित्य (छत्तीसगढ़) ने तिरंगे के सम्मान में सस्वर काव्य पाठ कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं मीरा सक्सेना (नई दिल्ली) ने कारगिल युद्ध के समय का अपना भावुक अनुभव साझा करते हुए बताया कि उस समय उनका बेटा छोटा था और युद्ध की चर्चाएं सुनकर कहता था, “माँ, मुझे भी बंदूक दिला दो।”
कवि दिनेश कुमार दुबे (तखतपुर, छत्तीसगढ़) ने छत्तीसगढ़ी भाषा में ओजपूर्ण कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। प्रथम प्रस्तुति देने वाली पुष्पलता शर्मा ‘पुष्प’ (रतलाम, मध्यप्रदेश) ने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान उनका पुत्र भी युद्ध क्षेत्र में तैनात था। उन्होंने विरह और देशभक्ति पर आधारित अत्यंत मार्मिक रचना प्रस्तुत की। वहीं डॉ. अर्चना पाण्डेय ‘अक्षिता’ (भिलाई, छत्तीसगढ़) ने अपनी कविता में कहा—”देश की खातिर मरने वाला ही शहीद कहलाता है।”
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. उर्मिला साईंप्रीत (कटनी, मध्यप्रदेश) एवं डॉ. ज्योति कृष्ण मिश्रा (पुणे, महाराष्ट्र) ने संयुक्त रूप से किया। दोनों संचालकों ने पूरे कार्यक्रम को गरिमामय और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया।
इस अवसर पर देशभर से अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकारों एवं कवियों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं। इनमें पुष्पलता शर्मा ‘पुष्प’ (रतलाम, मध्यप्रदेश), डॉ. ऋचा शर्मा ‘श्रेष्ठा’ (करनाल, हरियाणा), डॉ. ज्योति कृष्ण मिश्रा (पुणे, महाराष्ट्र), सरिता श्रीवास्तव (जोधपुर, राजस्थान), पुहुप राम यदु मोपर (भाटापारा, छत्तीसगढ़), डॉ. एस.पी. भारद्वाज (रुद्रपुर, उत्तराखंड), राकेश कुमार पंवार (बीकानेर, राजस्थान), डॉ. अंबे कुमारी (बोधगया, बिहार), डॉ. निराला पाठक (रांची, झारखंड), नीरजा सिंह (अमरावती, महाराष्ट्र), मनीष कुमार शर्मा (देवास, मध्यप्रदेश), डॉ. अर्चना पाण्डेय ‘अक्षिता’ (भिलाई, छत्तीसगढ़), कु. खुशी कुमारी (धनबाद, झारखंड), रेखा अंजू तिवारी (समाजसेविका एवं अधिवक्ता, कटनी, मध्यप्रदेश), डॉ. शशिकला अवस्थी (इंदौर, मध्यप्रदेश), सुनीता चौधरी (नीमच, मध्यप्रदेश), दिनेश कुमार दुबे (तखतपुर, छत्तीसगढ़), मीरा सक्सेना ‘माध्वी’ (नई दिल्ली), अविनाश खरे (पुणे, महाराष्ट्र), विजया बाला स्याल (पुणे, महाराष्ट्र), डॉ. उषा अग्रवाल ‘जलकिरण’ (छतरपुर, मध्यप्रदेश), भारत भूषण वर्मा (असंध, करनाल, हरियाणा), गोविन्द कुमार मिश्र ‘प्रभाकर’ (पुणे, महाराष्ट्र), डॉ. रुपाली गर्ग (नवी मुंबई, महाराष्ट्र), कविता नामदेव (नजीबाबाद, बिजनौर, उत्तर प्रदेश), सुनंदा बहुगुणे (बुरहानपुर, मध्यप्रदेश), प्रो. शरद नारायण खरे, डॉ. रामदेव शर्मा ‘राही’ (मथुरा, उत्तर प्रदेश), डॉ. कृष्णा जोशी (इंदौर, मध्यप्रदेश), उषा टिबड़ेवाल ‘मीरा’ (चेन्नई) तथा पंडित मुल्क राज ‘आकाश’ (गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश) सहित डॉ. ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी ‘शैलेश‘ ने अपनी सशक्त रचनाओं से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और साहित्य के माध्यम से राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में देशभक्ति की भावना जागृत करने के साथ-साथ साहित्य के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना को भी सुदृढ़ करते हैं।
