हर उम्मीद एक्सपेक्टेशन नहीं होती

एक-दूसरे का हाथ थामे भावनात्मक जुड़ाव दर्शाता युवा जोड़ा.

रुचि अग्रवाल, सिलीगुड़ी (पश्‍चिम बंगाल)

“हर उम्मीद एक्सपेक्टेशन नहीं होती, कुछ रिश्तों की ज़रूरत भी होती है”

रिश्ते बनाना आसान है, उन्हें तोड़ना भी आसान है, लेकिन उन्हें दिल से निभाना सबसे कठिन काम है। शायद यही वजह है कि आज के समय में बहुत से रिश्ते नाम के तो रह जाते हैं, लेकिन उनमें वह गर्माहट, अपनापन और एहसास कहीं खो जाता है।

एकतरफा रिश्ते अधिक समय तक टिक नहीं पाते। जब एक व्यक्ति पूरी शिद्दत से रिश्ता निभाता रहे और दूसरी ओर से न प्यार मिले, न परवाह, न एहसास, तो धीरे-धीरे वह रिश्ता थकने लगता है। शुरुआत में सब कुछ सुंदर लगता है। घंटों बातें करना, एक-दूसरे का साथ अच्छा लगना, छोटी-छोटी खुशियाँ बाँटना, सब कुछ किसी खूबसूरत सपने जैसा महसूस होता है। लेकिन समय के साथ कई रिश्तों में बदलाव आने लगता है।

धीरे-धीरे उम्मीदें, जिम्मेदारियाँ, अधिकार और इच्छाएँ जन्म लेने लगती हैं। पर इन सबके ऊपर जो सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है, वह है प्रेम। यदि रिश्ते में प्रेम और अपनापन ही न बचे, तो बाकी सारी बातें अर्थहीन लगने लगती हैं।

आज की दुनिया में अक्सर लोगों को “एक्सपेक्टेशन मत रखो” कहते सुना जाता है। लेकिन क्या हर चाहत को एक्सपेक्टेशन कहना सही है?

क्या अपने प्रिय व्यक्ति का हाथ थामने की इच्छा रखना गलत है?

क्या उसके साथ कुछ समय बिताने की चाह रखना गलत है?

क्या जन्मदिन पर उसे खास महसूस कराने की कोशिश करना गलत है?

क्या साथ घूमना, साथ खाना खाना, छोटी-छोटी शरारतें करना और यादगार पलों को और खूबसूरत बनाना गलत है?

यदि यह सब गलत है, तो फिर प्यार आखिर है क्या?

सच तो यह है कि हर चाहत लालच नहीं होती। हर अपेक्षा स्वार्थ नहीं होती। कुछ अपेक्षाएँ रिश्तों की साँस होती हैं। जब हम किसी से प्रेम करते हैं, तो स्वाभाविक रूप से उसके समय, उसके साथ और उसके स्नेह की इच्छा रखते हैं। यह अधिकार जताना नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का संकेत होता है।

समस्या तब नहीं होती, जब किसी रिश्ते में चाहत होती है। समस्या तब होती है, जब चाहत सिर्फ एक तरफ रह जाती है। जब एक व्यक्ति हर बार पहल करे, हर बार समझौता करे, हर बार इंतजार करे और दूसरी ओर से केवल खामोशी मिले, तब रिश्ता धीरे-धीरे एक बोझ बन जाता है।

रिश्ते केवल साथ रहने से नहीं चलते, बल्कि एहसासों से जीवित रहते हैं। यदि किसी रिश्ते में प्यार, सम्मान, अपनापन और एक-दूसरे के लिए समय ही न बचे, तो वह रिश्ता बाहर से जीवित दिखाई देता है, लेकिन भीतर से उसकी धड़कनें थम चुकी होती हैं।

इसलिए अगली बार जब कोई आपको कहे कि “रिश्तों में एक्सपेक्टेशन नहीं रखनी चाहिए”, तो एक पल रुककर सोचिए। क्या वह वास्तव में एक्सपेक्टेशन है, या फिर प्रेम की वह छोटी-सी चाहत, जो हर दिल स्वाभाविक रूप से रखता है?क्योंकि जहाँ प्रेम होता है, वहाँ थोड़ी-सी प्रतीक्षा होती है, थोड़ी-सी उम्मीद होती है और बहुत सारे एहसास होते हैं। शायद यही एहसास किसी रिश्ते में जान डालते हैं। रिश्ते तभी खूबसूरत बनते हैं, जब दोनों तरफ से दिल धड़कते हों। एकतरफा निभाए गए रिश्ते कुछ समय तक चल तो सकते हैं, लेकिन उन्हें मंज़िल तक पहुँचाने के लिए दोनों तरफ से प्रेम, सम्मान और प्रयास होना आवश्यक है।

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