
डॉ. नलिनी शर्मा, कृष्णा
मेरे देश के सभी बच्चों से मैं हाथ जोड़कर विनती करती हूँ—ऐसा कदम कभी मत उठाओ।
एक बार सोचो, जब इस वीडियो को देखकर मेरी आँखों से आँसू निकल आए, मेरा कलेजा जैसे फट गया और सीने में भारीपन-सा महसूस होने लगा। जबकि तुम मेरे कुछ भी नहीं लगते, मैंने तो केवल एक वीडियो देखी है। यदि मेरी यह हालत हो सकती है, तो सोचो उस माँ-बाप की क्या स्थिति होती होगी, जिसका अपना बच्चा ऐसा कदम उठा लेता है। क्या तुमने कभी उनके दर्द को महसूस किया है?
तुम जिस दुःख से बचने के लिए ऐसा सोचते हो, वह दुःख क्षणिक होता है। यदि कोई परीक्षा, नौकरी या लक्ष्य प्राप्त नहीं होता, तो माँ-बाप भी अंततः यही कहेंगे—”कोई बात नहीं बेटा, शायद यह हमारे भाग्य में नहीं था। कोई दूसरा काम कर लो, कोई और रास्ता चुन लो।” हाँ, उस समय का दुःख बहुत बड़ा और असहनीय लगता है, यह बात मैं मानती हूँ। लेकिन समय के साथ लोग भी यही कहते हैं कि जो भाग्य में नहीं था, वह नहीं मिला। और सत्य भी यही है कि हम सभी अपनी पूरी क्षमता और सामर्थ्य के अनुसार प्रयास करते हैं, फिर भी कभी-कभी सफलता नहीं मिलती। इसका अर्थ यह नहीं कि हिम्मत हार जाएँ। हो सकता है, सफलता किसी और रास्ते पर आपका इंतजार कर रही हो।
बच्चों, जब भी मन में नकारात्मक विचार आएँ, उस समय भगवान का स्मरण करो। उल्टी गिनती गिनो, अपना ध्यान दूसरी ओर लगाने की कोशिश करो। मन को शांत करने के लिए प्रार्थना करो, किसी अपने से बात करो, और याद रखो कि कठिन समय हमेशा स्थायी नहीं होता। भगवान पर भरोसा रखो। ईश्वर ने हर व्यक्ति के लिए कुछ न कुछ निश्चित किया है। अपने समय का धैर्यपूर्वक इंतजार करो।
कुछ भी करने से पहले एक बार यह अवश्य सोचो कि तुम्हारे बाद तुम्हारे माता-पिता की क्या स्थिति होगी। उनकी आकांक्षाएँ बहुत बड़ी होती हैं। हर माँ-बाप चाहते हैं कि उनका बच्चा जीवन में बहुत आगे बढ़े। लेकिन क्या हर बच्चा कलेक्टर बन सकता है? नहीं। इसका अर्थ यह भी नहीं कि प्रयास छोड़ दिए जाएँ। भविष्य किसने देखा है? हम सभी उम्मीद के सहारे ही आगे बढ़ते हैं।
होना या न होना, दोनों ही भाग्य और परिश्रम पर निर्भर करते हैं।मान लो कि तुम परिश्रम की चाबी लगातार लगा रहे हो, लेकिन ईश्वर अभी भाग्य की चाबी नहीं लगा रहा है। तब सफलता का द्वार कैसे खुलेगा?
इसे बैंक के लॉकर की तरह समझो। बैंक का लॉकर भी दो चाबियों से खुलता है। उसी प्रकार तुम्हारी किस्मत का बैंक भी दो चाबियों से खुलता है एक परिश्रम की और दूसरी भाग्य की।एक चाबी तुम्हारे हाथ में है और दूसरी ईश्वर के हाथ में। तुम्हारा काम है अपनी चाबी लगाते रहना। ईश्वर की चाबी कब लगेगी, इसका धैर्यपूर्वक इंतजार करो।मैं मानती हूँ कि असफलता बहुत दुःख देती है, लेकिन इसके कारण गलत कदम उठाना किसी समस्या का समाधान नहीं है।मेरे प्यारे बच्चों, मेहनत करो, सपने देखो, संघर्ष करो, लेकिन गलत कदम कभी मत उठाओ। अपने माता-पिता के बारे में अवश्य सोचो।
साथ ही मैं माता-पिता से भी निवेदन करती हूँ कि बच्चों पर आवश्यकता से अधिक दबाव न डालें। यदि ईश्वर ने उन्हें इस संसार में भेजा है, तो उनके लिए भी कोई न कोई राह अवश्य बनाई होगी।मेरे बच्चों, मैं तुम्हारा दुःख और तुम्हारी मानसिक स्थिति समझती हूँ। परिस्थितियों का सामना करना ही बहादुरी है, उनसे भागना नहीं।
एक और विनम्र निवेदन है आप जिस भी भगवान को मानते हों, प्रतिदिन कुछ समय उनके नाम का स्मरण अवश्य करें। जब भी अवसर मिले, प्रार्थना करें, सकारात्मक सोचें और विश्वास के साथ आगे बढ़ें। सही दिशा में किया गया परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाता।
परिश्रम की चाबी लगाते रहो, क्योंकि प्रसन्न मन से किया गया कार्य सफलता की संभावना को बढ़ा देता है।
बच्चों की परीक्षाओं के समय मैंने ये पंक्तियाँ लिखी थीं—
“हौसले कम नहीं किया करते,
आँख यूँ नम नहीं किया करते।
एक सपने के टूट जाने पर,
बेवजह ग़म नहीं किया करते।।”

सुंदर आलेख, इस प्रकार के आलेखों से कुछ न कुछ प्रभाव तो अवश्य उत्पन्न होता ही है ।
Good