उज्जैन-इंदौर ग्रीन कॉरिडोर: 35 मिनट में सफर

उज्जैन-इंदौर ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण, खेतों के बीच बनता चौड़ा हाईवे और चल रही मशीनें

सिंहस्थ 2028 से पहले बनेगा गेमचेंजर

उज्जैन और इंदौर के बीच बन रहा ग्रीन फील्ड कॉरिडोर अब केवल यात्रा समय घटाने की परियोजना नहीं रह गया है, बल्कि इसे सिंहस्थ 2028 और क्षेत्रीय आर्थिक विकास के गेमचेंजर के रूप में देखा जा रहा है। 48 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन मार्ग से जहां सफर महज 30 से 35 मिनट में पूरा होगा, वहीं यह पूरे मालवा क्षेत्र की कनेक्टिविटी और अर्थव्यवस्था को नई गति देगा।

सिंहस्थ को ध्यान में रखकर तेज हुई रफ्तार
संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने चंद्रावतीगंज में निर्माण कार्य का निरीक्षण कर स्पष्ट कर दिया कि यह परियोजना प्राथमिकता में है। मोहन यादव के निर्देशों के तहत इसे सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि लाखों श्रद्धालुओं के आवागमन को आसान बनाया जा सके।

सिर्फ सड़क नहीं, विकास का कॉरिडोर
यह कॉरिडोर मौजूदा उज्जैन-इंदौर रोड पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करेगा और एक वैकल्पिक, तेज और सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगा। साथ ही, इंदौर एयरपोर्ट से उज्जैन आने वाले पर्यटकों के लिए सीधी कनेक्टिविटी मिलने से पर्यटन और स्थानीय व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

ग्रामीणों के हितों का भी ध्यान
इस परियोजना को नॉन-एक्सेस कंट्रोल सड़क के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को कहीं से भी प्रवेश और निकास की सुविधा मिलेगी। इसे एलिवेटेड बनाने के बजाय जमीनी स्तर पर तैयार किया जा रहा है, ताकि किसानों और स्थानीय आबादी को कम से कम परेशानी हो।

भूमि अधिग्रहण और भविष्य की योजना
इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 28 गांवों की 175 हेक्टेयर से अधिक जमीन अधिग्रहित की जा रही है। यह कॉरिडोर भविष्य के ट्रैफिक और शहरी विस्तार को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।

गुणवत्ता और समयसीमा पर सख्ती
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने एमपीआरडीसी को साप्ताहिक लक्ष्य तय करने और निर्माण की गुणवत्ता से कोई समझौता न करने के निर्देश दिए। प्रशासन का मानना है कि यह परियोजना समय पर पूरी हुई तो न केवल सिंहस्थ के दौरान ट्रैफिक समस्या खत्म होगी, बल्कि यह मार्ग लंबे समय तक क्षेत्र के विकास की रीढ़ बनेगा।

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