तेरी यादों का सैलाब

तेरी यादें जब भी उठती हैं तो सैलाब-सी बनकर मन को बहा ले जाती हैं। आँखों से आँसुओं के कतरे ढलते हैं, और हर कण में तेरा ही नूर झलकता है। तू अपनी जुल्फ़ों से बहारों को महकाती है, इंद्रधनुष-सी रंगीन चूनर लहराती है और चांदनी रातों को मधुशाला बना देती है। जितना तुझे भूलने की कोशिश करता हूँ, उतनी ही गहराई से तू याद आती है।

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सुनो ना…

वह कहती है—मत करो मुझे इतना प्यार, क्योंकि हमें पता है कि हमारा साथ अब लंबा नहीं है। फिर भी वह चाहती है कि इन कुछ पलों में वह सब समेट ले—सिंदूरी शाम, तारों से भरी चांदनी रात, भीनी-भीनी हवाएँ और उसका हाथ थामे उसकी मुस्कुराहट। उसकी चाहत बस इतनी है कि जब विदा का समय आए, तो उसकी आँखों में आंसुओं की जगह मुस्कान हो, और उसके जीवन का पिंजरे में बंधा पाखी उसी मुस्कान से मुक्त हो सके।

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