Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

आख़िर में…

ज़िंदगी भर मुखौटे पहनती रही. अच्छी बीवी”, “अच्छी बहू”, “बेबस मां” के।
नींद हमेशा अधूरी रही, काम हमेशा पूरे हुए।
जब आख़िरकार सुकून की नींद मिली, तब भी किसी ने झिंझोड़ कर जगा दिया।अब तो मैं बस यही कहना चाहती हूं . “मुझे अब तो सोने दो… अब कोई मुखौटा नहीं, कोई फ़र्ज़ नहीं. बस नींद।”

Read More