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महफ़िल अदब की

हर उड़ान को एक डोर चाहिए — जैसे हर रिश्ते को भरोसा।
बिना उस जोड़ के, कोई पतंग ऊँचाइयों तक नहीं पहुँचती, जैसे बिना बरसात के कोई मोर नहीं नाचता।
मेरे लिए मंज़िल वही है जहाँ तुम हो; और जो राह तुम्हारी ओर न जाती हो, उसे चुनने का कोई अर्थ नहीं।
दिल पर ज़ोर चलाने की बातें बस किताबों में अच्छी लगती हैं — हक़ीक़त में तो हर इंसान अपनी दबाई हुई ख़्वाहिशों का कैदी है।
यह महफ़िल अदब की है, यहाँ शब्दों से शोर नहीं, रोशनी फैलानी होती है — सुख़न की शम्मअ जलानी होती है। कभी नज़रों से, कभी दिल से लोग चुराते रहते हैं —

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