Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

सिंदूर-खेला

पूजा पंडाल में ढोल की थाप गूँज रही थी। विसर्जन से ठीक पहले का दिन! लाल बॉर्डर की सफेद साड़ी में सजी महिलाएँ माँ दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर, एक-दूसरे की माँग और गालों पर रंग भर रही थीं।

भीड़ के बीच खड़ी रितुपर्णा बाहर से मुस्करा रही थी, मगर भीतर खालीपन था। कुछ महीने पहले पति ने शराब के नशे में घर से निकाल दिया था। अकेली रहती तो ठीक था, पर बच्चे की परवरिश? सोचकर दिल डूब जाता।

तभी उसकी नज़र पंडाल के कोने में गई—एक आदमी अपनी पत्नी पर चिल्ला रहा था। अगले ही पल गाल पर जोरदार थप्पड़! भीड़ ने देखा, पर सब चुप। औरत आँचल मसलती, आँखें झुकाए आँसू पोंछ रही थी।

Read More