Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

बदलता वक़्त

कभी अल्हड़ और शरारती रहे हम, अब समझदार होकर चुप्पी में जीना सीख गए हैं। मौसम, बारिश और दोस्तों संग बिताए हंगामे पीछे छूट गए। अब खुशियाँ भी मन में ही दबाकर रख लेते हैं। ज़िंदगी की राह पर निकले तो थे कहीं और, पर दिशा बदल गई और हम धीरे-धीरे बदलते गए।

Read More

दास्तान ए जिंदगी

दास्तान-ए-ज़िंदगी” उस कहानी को बयां करती है जो काग़ज़ पर नहीं, आँखों की नमी में लिखी जाती है। जज़्बात कभी शब्द बनकर नहीं उतरते—वे खून की जुबान में अपनी दास्तान सुनाते हैं। चाँद को दिल में सँभाल कर रखने की मासूम हिदायत है, क्योंकि उसकी चाँदनी भी शरमाती है। रात की वीरानी, सूने सपने और ख़ामोश गलियाँ एक अकेलेपन का नक्श बनाती हैं। फिर भी किसी की मुस्कुराहट दिल की धड़कनों में रवानी भर देती है।

Read More