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कहाँ खो गई यह खूबसूरती..

“महिदपुर रोड का वह स्कूल बगीचा कभी शहर की साँसों का सहारा था। कतारबद्ध वृक्ष मानो ध्यानमग्न तपस्वी की तरह खड़े रहते, पूर्णिमा की रात को झक-सफेद बगुलों और फूलों से लदकर ताजमहल से भी सुंदर दिखते। उन पेड़ों के नीचे की घास पर बैठकर साँझ गुज़ारना, मिट्टी की सौंधी खुश्बू में साँस लेना और सर्दियों में धूप में लगने वाली कक्षा—ये सब जीवन का अनमोल हिस्सा थे। आज वहीं घास की जगह पॉलीथिन है, हरियाली की जगह कचरा और सुना है कि अब वहाँ बस स्टैंड बनेगा। विकास की इस दौड़ में हमने अपनी असली खूबसूरती कहीं पीछे छोड़ दी है।”

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