पुराना भारतीय घर, टूटी दीवारें, खाली आँगन और बचपन की यादों का भावुक दृश्य

वो घर मेरा

सालों बाद जब कोई अपने पुराने घर लौटता है, तो दीवारें भी जैसे बोल उठती हैं। यह कविता उसी एहसास को बयां करती है जहां कभी हँसी गूंजती थी, आज वहां खामोशी है, और यादों की नमी हर कोने में बसती है।

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