नारी शक्ति

नारी केवल परिवार की धुरी नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और राष्ट्र के निर्माण में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्राचीन काल से ही सीता, गार्गी, सावित्री और अपाला जैसी नारियों ने अपनी बुद्धिमत्ता और साहस से समाज को नई दिशा दी। मध्यकाल में रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई होल्कर और बेगम हजरत महल जैसी वीरांगनाओं ने अपने साहस से यह सिद्ध किया कि नारी किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं।
आधुनिक युग में भी नारी ने हर क्षेत्र—विज्ञान, राजनीति, कला, खेल और व्यापार—में सफलता के झंडे गाड़े हैं। कल्पना चावला, किरण बेदी, सुनीता विलियम्स और मैरी कॉम जैसी प्रेरणादायी महिलाएँ इसका प्रमाण हैं।

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रिश्तों का जहर: क्यों टूट रहे हैं पवित्र बंधन

पति-पत्नी का रिश्ता भारत में सबसे पवित्र और गहरा माना जाता है, लेकिन आज समाज में यह रिश्ता नफ़रत, संदेह और हिंसा का केंद्र बनता जा रहा है। पति द्वारा पत्नी पर अत्याचार, पत्नी द्वारा पति की हत्या, दहेज, संपत्ति, विवाहेतर संबंध और संवाद की कमी—ये सभी कारण रिश्तों को ज़हरीला बना रहे हैं। मीडिया और सोशल मीडिया पर ऐसी घटनाएँ लगातार सामने आती हैं, जो रिश्तों की पवित्रता और समाज की नींव पर सवाल उठाती हैं।

समाधान संवाद, काउंसलिंग, कानूनी जागरूकता, संस्कार और धैर्य में निहित है। प्रेम, विश्वास और आपसी सम्मान ही वह रास्ता है जिससे पति-पत्नी के रिश्ते सुदृढ़ और खुशहाल बन सकते हैं। अगर यह समझ नहीं आया, तो समाज में “नीले ड्रम” और “ज़हर” जैसी खौफनाक घटनाएँ लगातार दोहराई जाएँगी।

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 समानता का दावा 

हमारे समाज में बराबरी का दावा तो बहुत किया जाता है, मगर हकीकत कुछ और ही है। एक ओर बेटों की चाह में बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है, तो दूसरी ओर दहेज के लिए उन्हें जलाया जाता है। बलात्कारियों को बचाने की कोशिश की जाती है, जबकि पीड़िताओं से कठोर सवाल पूछे जाते हैं।

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