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होशियार मां

सरला को यक़ीन था कि उसकी बहू उसकी सहेली बनेगी। पर शादी के बाद कहानी कुछ और ही निकली। रिश्ते की शुरुआत से ही अमीषा के नख़रे और लालच से अमित टूटने लगा। जब उसने पैसों और ज़मीन की माँग की तो सरला को समझ आ गया — बात सिर्फ़ ईगो या गलतफ़हमी की नहीं, लोभ की थी। बेटे को बचाने के लिए उसने शांति से, लेकिन चतुराई से उस सच को रिकॉर्ड कर लिया — जिस पर अमीषा को हमेशा भरोसा था कि कोई पकड़ नहीं पाएगा।कोर्ट में सच्चाई का वीडियो जैसे ही सामने आया सबकी स्थिति पलट गई।

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अपनी बारी

ऑटो से उतारना, पसीना पोंछना, पानी पिलाना और कंधे पर भार उठाकर घर ले जाना—सास के लिए बहू का यह समर्पण रोज़ देखने को मिलता था। पूछने पर उसने मुस्कुराकर कहा, “मेरे बच्चों को इन्होंने फूल जैसा पाला है… अब मेरी बारी है।”

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