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कमियाँ हर इंसान में होती हैं, लेकिन बदनाम सिर्फ चाँद होता है. यह कविता चाँद की खूबसूरती, उसकी चाँदनी और इंसानी सोच की गहराई को बेहद भावुक अंदाज़ में प्रस्तुत करती है.

चांद में दाग

चाँद में दाग़ जरूर होता है, लेकिन मानव भी कभी पूर्ण नहीं होता। कमियाँ सभी में होती हैं, फिर भी केवल चाँद ही बदनाम माना जाता है। उसकी खूबसूरती, गुण और चाँदनी की रौशनी, अंधेरे को काट देने की क्षमता, पूर्णमासी की छटा—सब कुछ अद्भुत है। अमावस की रात को उसकी कमी महसूस होती है, लेकिन आसमान में उसकी सुंदरता और प्यारा प्रभाव सबको भाता है। अक्सर लोग केवल दोष देखते हैं, जबकि अगर हम अपने गिरेबान में झाँकें, तो पता चलता है कि हमारी खुद की कमियाँ भी उतनी ही स्पष्ट हैं।

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