जहाँ रातें सिसकती हैं
यह कविता झोपड़ी में पलती गरीबी, भूख से बिलखते बच्चे और परिवार के लिए संघर्ष करती एक माँ की दर्दभरी कहानी कहती है। सिसकती रातों और टूटी उम्मीदों के बीच यह कविता समाज की कठोर सच्चाई को संवेदनशील शब्दों में सामने लाती है।

यह कविता झोपड़ी में पलती गरीबी, भूख से बिलखते बच्चे और परिवार के लिए संघर्ष करती एक माँ की दर्दभरी कहानी कहती है। सिसकती रातों और टूटी उम्मीदों के बीच यह कविता समाज की कठोर सच्चाई को संवेदनशील शब्दों में सामने लाती है।