इश्क नहीं… मगर कम भी नहीं
रिद्धिमा और राघव की यह कहानी प्रेम, अपनापन और भावनात्मक सीमाओं के बीच खड़े एक ऐसे रिश्ते की दास्तान है, जहाँ स्नेह है, पर अधिकार नहीं।

रिद्धिमा और राघव की यह कहानी प्रेम, अपनापन और भावनात्मक सीमाओं के बीच खड़े एक ऐसे रिश्ते की दास्तान है, जहाँ स्नेह है, पर अधिकार नहीं।
मैले कपड़ों में कमल-सी खिलती वह गूंगी-बहरी लड़की हर रोज़ उसे निहारती थी। वह समझ नहीं पाता कि वह उससे क्या चाहती है, जब तक कि एक दिन उसके मांग भरने के इशारे ने मूक प्रेम का गहरा अर्थ खोल नहीं दिया।