मूक प्यार…

मैले कपड़ों में कमल-सी खिलती वह गूंगी-बहरी लड़की हर रोज़ उसे निहारती थी। वह समझ नहीं पाता कि वह उससे क्या चाहती है, जब तक कि एक दिन उसके मांग भरने के इशारे ने मूक प्रेम का गहरा अर्थ खोल नहीं दिया।

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