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तेरी बिंदी

आज तुम्हारे भाल पर बिंदी बीचों-बीच सजनी चाहिए थी, पर तुमने उसे किनारे सरका दिया। यह कैसी गुस्ताख़ी? बस उसी को ठीक करने आया हूँ।”
उसने नंदिनी की बिंदी को मध्य में सजाया, और उसी क्षण उनकी साँसें थम-सी गईं।
रात को नंदिनी ने वही बिंदी आईने पर चिपकाते हुए धीमे से कहा—“अब यहाँ विराजिए निखिल जी… र हाँ, आँखें बंद रखना।”अगले दिन जब उसने निखिल का स्केच देखा, उस पर लिखा था—
“एक संपूर्ण रमणी नंदिनी।”

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