gulmohar
आधुनिक रिश्तों में दूरी और भावनात्मक अकेलेपन को दर्शाता उदास प्रेम दृश्य

…जब मोहब्बत नुमाइश बन गई

अब मोहब्बत भी लिबासों की तरह हो गई है – रोज़ बदलती, ज़माने की रवायत बन चुकी। कभी जो खतों में दिल की धड़कनें उतरती थीं, अब वो सिलसिला कहीं खो गया है। प्यार की जगह नुमाइश रह गई है।

इश्क़ का मिज़ाज देखकर लगता है कि लोगों के पास अब बस फुरसत ही फुरसत है, लेकिन मोहब्बत की असल सदाएं कहीं गुम हो गई हैं। चाहत अब इबादत बनकर रह गई है, और वफ़ा के नाम पर धोखे मिलना किस्मत। आज दुआएं भी सिक्कों में लुटती हैं, अमीरी भी ज़लालत सी लगने लगी है। इरादों को गलत अंजाम देना दीवानों की हिमाकत कहलाता है और बिना वजह इल्ज़ाम लगाना, सियासत।

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