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एहतियात कैसी ?

सपने सदियों से कल्पना के आसमान में उड़ान भरते आए हैं और हर बार यथार्थ की धरती पर लौटकर हमें यही सिखाते हैं. जब दिल सच्चा हो, तो एहतियात की कैसी गुंजाइश? एक मुट्ठी आसमान, शबनम का छोटा-सा कतरा इन छोटी-सी चीज़ों में भी प्रेम दरिया बनकर उमड़ आता है।

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