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hindi divas

हिंदी है मेरी पहचान 

हिन्दी हमारी मातृभाषा है, हमारे अस्तित्व का पहला परिचय और हमारी पहचान का अभिन्न हिस्सा। मुख से निकला पहला शब्द “मां” हिन्दी का ही रूप है, जिसकी मधुरता कानों में ऐसे घुलती है जैसे मिस्री का स्वाद। इस पर गर्व करना स्वाभाविक है कि हिन्दी हमें मातृभाषा के रूप में मिली है।लेकिन दुख की बात यह है कि आज यही भाषा उपेक्षित सी हो गई है। आधुनिकता की आड़ में युवा पीढ़ी अंग्रेज़ी बोलने को शान मानती है और हिन्दी बोलने में संकोच या हीनता महसूस करती है। जब स्वयं युवाओं को हिन्दी का ज्ञान नहीं है, तो आने वाली पीढ़ी को वे क्या सिखाएंगे? सच्चाई यह है कि हर भाषा का सम्मान होना चाहिए, पर मातृभाषा हिन्दी को सम्मान और गर्व के साथ अपनाना हम सबका कर्तव्य है। हिन्दी बोलना अपमान नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और स्वाभिमान का प्रतीक है।

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