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क्या हिंदी सनातन का आधार है?

हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत धारा का सेतु है। संस्कृत जहाँ गूढ़ ज्ञान की वाहक है, वहीं हिंदी उसे सरल बनाकर लोकजीवन तक पहुँचाती है। संत तुलसीदास, सूरदास, कबीर और मीरा ने हिंदी को संस्कृति और भक्ति का सशक्त वाहक बनाया। महात्मा गांधी ने इसे “जन की भाषा” कहा। हिंदी संवाद का माध्यम होने के साथ-साथ स्वतंत्रता, आत्मगौरव और राष्ट्र चेतना की वाणी भी रही। यह भाषा वेदों की ऊँचाई और गाँव की मिट्टी की महक दोनों लिए हुए है, और हमें इसे प्रतिदिन बोलने, पढ़ने और लिखने से ही जीवित रखना चाहिए।

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