सर्टिफिकेट
सिर्फ़ शादी होना सर्टिफिकेट नहीं होता, माँ!” — अनीता की ये बात एक सशक्त सामाजिक सवाल खड़ा करती है: क्या एक स्त्री की स्वतंत्रता और निर्णय का मापदंड सिर्फ विवाह होना चाहिए?

सिर्फ़ शादी होना सर्टिफिकेट नहीं होता, माँ!” — अनीता की ये बात एक सशक्त सामाजिक सवाल खड़ा करती है: क्या एक स्त्री की स्वतंत्रता और निर्णय का मापदंड सिर्फ विवाह होना चाहिए?
इस कविता में एक स्त्री अपने जीवन के उस मोड़ पर खड़ी होकर गुज़रे समय को फिर से जीने की ख्वाहिश करती है — वो अधूरे सपने, वो रिश्ते, वो बचपन की अलमारी, और माँ की बातें… सब कुछ एक बार फिर सहेजने की उम्मीद लिए। यह एक आत्ममंथन है, एक नई शुरुआत की ओर बढ़ने का भावुक आह्वान।”