नीम का पेड़

एक लंबे समय बाद उसी स्टेशन पर उतरते ही यादों की महक मुझे बाँहों में भर लेती है। बचपन की गलियाँ, नीम का पेड़, उड़ती रुई और टूटी-फूटी बस सब मन के भीतर फिर से जीवित हो उठते हैं। मगर जब शहर नए नामों और मॉलों में बदल चुका होता है, तो एहसास होता है कि स्मृतियाँ जहाँ ठहरी थीं, समय वहाँ से बहुत आगे निकल गया है।

Read More

घर वापसी

घर लौटने का सुख वही जानता है जिसने अनजान राहों पर किस्मत के सहारे सफर किया हो, स्टेशन की पानीदार चाय से भूख बुझाई हो, और आखिर में अपने लोगों से फिर मिलने की गर्माहट महसूस की हो, क्योंकि घर वापसी सिर्फ लौटना नहीं, अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ जाना है।

Read More