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शताब्दी वर्ष पर मोहन राकेश को याद किया ‘बतरस’ ने॰॰॰

मुंबई के केशव गोरे ट्रस्ट सभागार में सांस्कृतिक संस्था ‘बतरस’ के 27वें मासिक आयोजन में साहित्यकार मोहन राकेश की रचनात्मक विरासत पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने उन्हें आधुनिक हिंदी साहित्य और नाटक का सशक्त स्तंभ बताते हुए कहा कि उनका साहित्य आज भी सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं के कारण प्रासंगिक है। कार्यक्रम में उनके नाटकों और कहानियों के अंशों की प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ हुईं और समापन राष्ट्रगीत के साथ किया गया।

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