रसोई में नई बहू कढ़ाही में हलवा बनाते हुए, पास खड़ी सास गर्व और स्नेह से मुस्कुराते हुए देख रही हैं, चारों ओर पारंपरिक घरेलू वातावरण

उम्मीद से बढ़कर

यह कहानी पारिवारिक रिश्तों में छिपी सहजता और पूर्वाग्रहों के टूटने की एक मधुर झलक प्रस्तुत करती है। जहाँ सास को अपनी पढ़ी-लिखी बहू से रसोई की उम्मीद नहीं होती, वहीं बहू अपनी सरलता और संस्कारों से सबका मन जीत लेती है। छोटी-सी घटना के माध्यम से यह रचना बताती है कि सच्ची खुशी अक्सर हमारी उम्मीदों से कहीं बढ़कर होती है और रिश्तों में विश्वास व अपनापन ही सबसे बड़ा मूल्य है।

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बेचारी बिल्ली

आंगन में लगे अमरूद के पेड़ को देखकर बहूरानी का मन हर रोज़ ललचा जाता था, लेकिन आंगन की खाट पर बैठी माँजी की वजह से चुपके से तोड़ पाना मुश्किल था। एक दिन माँजी गहरी नींद में थीं, तो बहू ने जल्दी से कुछ अमरूद तोड़कर खिड़की वाली मेज़ पर छुपा दिए। लेकिन इस पूरी चोरी को एक सयानी बिल्ली देख रही थी। बाद में वही बिल्ली मेज़ पर चढ़कर सारे अमरूद उठा ले गई। जैसे ही सास-बहू ने देखा, बहू तो घबरा गई, और सास ने गुस्से में “चालाक बिल्ली” को चप्पल-डंडे से खूब भगाया।

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