Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
धुंधले शहर की पृष्ठभूमि में अकेला शायर, न्याय के तराज़ू और बिखरे हुए मुखौटों का प्रतीकात्मक दृश्य

किसे गुनहगार कहें

“किसे गुनहगार कहें” एक समकालीन हिंदी ग़ज़ल है, जो समाज, न्याय व्यवस्था और नैतिक मूल्यों पर गहरी चोट करती है। हर शेर वर्तमान समय की विडंबनाओं को उजागर करता है, जहाँ सच और झूठ की सीमाएँ धुंधली होती दिखाई देती हैं। बाज़ारवाद, न्याय, आरोप और सफलता के बदलते अर्थों पर तीखा व्यंग्य करती यह ग़ज़ल पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है। सरल लेकिन प्रभावशाली भाषा में लिखी गई यह रचना आज के सामाजिक यथार्थ का सशक्त प्रतिबिंब है।

Read More