भीड़

भीड़ के बीच बैठी खून से लथपथ घबराई लड़की को युवक ने अपना कोट ओढ़ाकर उठाया, और तमाशा देखती भीड़ पर गुस्से से गरज उठा.“अगर आपकी बेटी होती, तो भी ऐसे ही खड़े रहते?”

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वह बहक गई थी…

“महान बनने की चाहत में वह बहक गई थी, लेकिन इस युग में महानता नहीं, इंसान को पढ़ने की आवश्यकता है। न कोई विद्यालय, न परीक्षा, केवल परिणाम — जो या तो हानि देगा या लाभ। संवेदनशीलता की अति पागलपन की ओर ले जाती है, जहाँ न कोई पहचान होती है, न कोई अस्तित्व, बस एक मानसिक रोगी का दर्जा। यही है महान बनने की प्रक्रिया का असली संघर्ष।”

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