दिलों को जोड़ती, नफरतों को तोड़ती हिंदी

हिंदी अपनी निर्बाध गति से आगे बढ़ती है और लोगों के दिलों को जोड़ती है। यह हिंदुस्तान का हृदय बनकर अपनी सरल और सहज चाल से सबको साथ लेती है। हिंदी संस्कृतियों के बीच पुल बनाती है और वर्जनाओं को तोड़ती है। यह सुहृदयजनों के भावों को अपनी ओर मोड़ती है और परंपराओं को तोड़कर नई परंपराएं बनाती है। हिंदी राम-रहीम और कृष्ण-करीम जैसी एकता को सामने लाती है, बंटी-बबली जैसी कहानियों को अपनाती है और अनेक भाषाओं के दरिया को अपनी ओर मोड़ती है। यह पूरब, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण से दिलों को जोड़ती है, प्रेम और इंसानियत को बढ़ाती है और नफरतों को दूर करती है।

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माँ का पीतल का संदूक

माँ का पीतल का संदूक—छोटा, पर सोने-सा चमकता। उसमें सहेजे गए गहने, सिक्के, पान और यादें पीढ़ियों की परंपरा और स्नेह का दीप हैं। बचपन से मुझे खींचने वाला यह संदूक अब मेरी नई यादों और ज्वेलरी का घर बन गया है।

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गहनों की चमक के बीच कविता और संस्कृति की झिलमिलाहट

त्यौहारों की चहक, लोकगीतों की मिठास और कविता की गूंजइन सबका संगम उस शाम देखने को मिला, जब सेनको गोल्ड शॉप ने तीज पर्व के अवसर पर एक विशेष आयोजन किया. आमतौर पर चमचमाते गहनों और ग्राहकों की चहल-पहल से सजी इस शॉप ने उस दिन संस्कृति, परंपरा और कला का रंगीन आँगन सजाया. शाम की शुरुआत पारंपरिक मेहंदी से हुई. आमंत्रित कवयित्रियों के हाथों में मेहंदी रचाई गई, जिसने पूरे वातावरण को तीज की सुगंध से भर दिया. मुस्कुराहटों और गीतों के बीच यह दृश्य मानो घर-आँगन के उत्सव को जीवंत कर रहा था.

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