घर वापसी

घर लौटने का सुख वही जानता है जिसने अनजान राहों पर किस्मत के सहारे सफर किया हो, स्टेशन की पानीदार चाय से भूख बुझाई हो, और आखिर में अपने लोगों से फिर मिलने की गर्माहट महसूस की हो, क्योंकि घर वापसी सिर्फ लौटना नहीं, अपनी जड़ों से दोबारा जुड़ जाना है।

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 दर्द

वक्त ने हमसे कई अपने छीन लिए, वरना हमारा कारवां भी कभी बड़ा हुआ करता था। हमने भी कभी रेत पर सपनों के रंगों से शब्द लिखे थे, पर लहरों का जोर इतना था कि सब मिट गया। भयानक आंधियों में भी आसमान तो ठहरा रहा, मगर पंछियों की चोंच खाली थी। जिसे अपने हुनर पर पूरा भरोसा था, वही शहर की बिगड़ी हवा में गुम हो गया। जिस पेड़ ने जिंदगी भर छाँव दी, उसी पेड़ से उसने रिश्ता तोड़ लिया। जो हमेशा दूसरों की थालियाँ भरता रहा, आज उसकी अपनी थाली खाली है। अब उसने आसमान की फिक्र छोड़ दी है . बस ज़मीन को सिर पर उठाकर आगे बढ़ना सीख लिया है।

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