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अवधेशानंदजी महाराज से बातचीत करते वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा

जब बेबाक पत्रकार भी कुछ पल के लिए ठहर गए

वरिष्ठ पत्रकार कीर्ति राणा ने बड़े-बड़े लोगों से बेबाक बातचीत की है, लेकिन अवधेशानंदजी महाराज के सामने उनकी सहजता में एक अलग ही भाव दिखाई दिया. यह मुलाकात सम्मान, आत्मीयता और लंबे समय से संजोई इच्छा की कहानी है.

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प्रेम में…

प्रेम जब आया, तो स्त्री न केवल पत्नी रही, न प्रेयसी वह मां बन गई, धारण करने वाली, संभालने वाली। पुरुष भी न प्रेमी बन सका, न पूरा आदमी; वह तो जैसे शिशु हो गया, स्नेह और सहारे पर टिका हुआ। प्रेम ने पशु से भी पशुत्व छीन लिया और वह संत-सा शांत और सहज हो उठा। तब लगा, प्रेम कोई साधारण भाव नहीं यह क्रांति है,

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