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यूँ आज़माना नहीं चाहिए…

आज हमें किसी बहाने से परखा नहीं जाना चाहिए। दिल चाहता है कि हम सिर्फ उसी के दिल में रहें और किसी और ठिकाने की तलाश न करें। अगर बरसना है तो पूरी ताकत से बरसें, क्योंकि बाद का मौसम सुहाना नहीं चाहिए। हमें काम करते रहना चाहिए, राह में चलते रहना चाहिए, और व्यर्थ में समय गंवाना ठीक नहीं। नई खोज और नए काम होने चाहिए; वही पुराने राग हमें नहीं चाहिए। मुश्किलों में जो काम आता है, उसे बाद में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वे भावनाएँ और ख़त, जो हमने लिखे हैं, उन्हें जलाना नहीं चाहिए। और जब दर्द मिले, उसे आँखों से महसूस करो; आँसुओं को दबाना ठीक नहीं।

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जीवन जंग नहीं

यह कविता जीवन को केवल संघर्ष और काँटों से भरा हुआ मानने की मानसिकता को तोड़ती है। कवि कहता है कि जीवन सिर्फ कठिनाइयों और कटु अनुभवों का नाम नहीं है, बल्कि इसमें फूलों जैसी सुंदरता, मधुरता और उमंगें भी समाई हुई हैं।
जीवन की राह में यदि कोई विचलित होकर बीच में ही रुक जाए तो वह अपने लक्ष्य तक कभी नहीं पहुँच सकता। पराजय के डर से भागने वाला कभी विजयी नहीं कहलाता। अंधकार से भयभीत होकर रुकने वाला व्यक्ति प्रकाश की ओर कदम नहीं बढ़ा सकता। दूरी से हताश होने वाला कभी मंज़िल तक नहीं पहुँच पाता।

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