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पुरानी पुस्तकों, पांडुलिपियों और शब्दों के प्रतीकों के बीच विचारमग्न साहित्यकार का कलात्मक दृश्य, जो भाषा, समय और संस्कृति के गहरे संबंध को दर्शाता है।

लफ़्ज़ों की नसों में बहता हुआ वक़्त

प्रो. डॉ. मनु की कविता “लफ़्ज़ों की नसों में बहता हुआ वक़्त” शब्दों, अर्थों और उनकी ऐतिहासिक जड़ों की एक गहन साहित्यिक यात्रा है। यह रचना बताती है कि हर लफ़्ज़ अपने भीतर समय, संस्कृति और मानवीय अनुभवों का एक पूरा संसार समेटे रहता है।

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