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हरी दूब

“हरी दूब” कविता जीवन की आपाधापी में सुकून के छोटे-छोटे क्षणों की तलाश है, जहाँ आकाश के बदलते रंग, श्रमिक की दुआ और घास की मुलायम हरियाली मिलकर मनुष्य को ठहरने और महसूस करने का अवसर देते हैं।

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आसरा

पने भीतर के अदृष्ट संसार और भावनाओं की गहराई को व्यक्त करती हैं। यह कविता यादों, अनुभवों और उन कहानियों की प्रतीक है जो हमारे मन में ठहरी रहती हैं—जैसे कवियों की स्मृतियाँ, वर्जीनिया का मौन, मीरा का विस्मय और अजनबी महिलाओं की अधूरी चिट्ठियां। इस अदृश्य संसार के बीच, कवयित्री अपने विचारों को हर रात धीरे-धीरे खो देती हैं, जैसे कोई ज्योत अपने ही प्रकाश से थक गई हो। अंततः, एक प्रिय व्यक्ति की निस्पंद धड़कनों में मिलने वाला आसरा उसे थके हुए मन को सहारा देने और हृदय का भार साझा करने की अनुभूति कराता है।

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