एक भारतीय गली में खड़ा वफ़ादार देसी कुत्ता गुस्से से एक शराबी व्यक्ति की ओर भौंक रहा है, जबकि पास में एक वृद्ध महिला सुरक्षित खड़ी है। दृश्य साहस, सुरक्षा और मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता है।

‘सबक’

‘सबक’ एक मार्मिक हिंदी लघुकथा है, जो यह बताती है कि संवेदना और कृतज्ञता केवल इंसानों की नहीं, पशुओं की भी पहचान होती है। गंगू चाची के स्नेह और सम्मान का ऋण चुकाने के लिए शेरू अन्याय का डटकर सामना करता है। यह कहानी केवल एक कुत्ते की वफ़ादारी नहीं, बल्कि महिला सम्मान, मानवीय संवेदनाओं और गलत के खिलाफ खड़े होने का सशक्त संदेश भी देती है। अंत में पाठक के मन में यही प्रश्न रह जाता है कि असली इंसानियत किसमें है इंसान में या उस बेजुबान में?

Read More