Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
“बाजोट कहानी संग्रह की थीम दर्शाता भारतीय पारिवारिक और सामाजिक दृश्य”

“बाजोट”: रिश्तों के आईने में झांकता सच

“बाजोट” कहानी संग्रह आधुनिक भारतीय समाज, रिश्तों की जटिलताओं और मनुष्य के आंतरिक द्वंद्व का सजीव चित्रण है। यह समीक्षा पुस्तक की हर कहानी के गहरे अर्थ और सामाजिक संदर्भ को उजागर करती है।

Read More

“अगर ‘ना’ कह देती तो मैं गुलज़ार होता”

दुनिया कहती है कि हर एक सफल पुरुष के पीछे एक स्त्री होती है!
लेकिन भैया लोग, मैं तो स्पष्टवादी हूँ, कहीं-न-कहीं से हरीशचंद्र जी की फैमिली से जुड़ा हूँ, इसलिए साफ-साफ कहता हूँ कि मेरी असफलता के पीछे मेरी बीवी का ही हाथ है!अब देखिए न, यदाकदा मेरे फेसबुक मित्र मिलते रहते हैं—कभी बाज़ार में, कभी मॉल में, कभी रास्तों पर तो कभी गार्डन में। अक्सर लोग यही कहते हैं—”अनुपम जी, आप अच्छा लिखते हैं, मज़ा आ जाता है, आप अपने लेखों को संकलित करके छपवाइए न।”

Read More