मंत्री आईं तो बन गईं देवी !
मंत्री के दस मिनट के दौरे के लिए पंडाल, कारपेट, भजन, जय-जयकार और मिठाई तक. इस व्यंग्य में एक बच्चे का मासूम सवाल लोकतंत्र में जनता की भूमिका और राजनीतिक चेतना की पूरी कहानी सामने रख देता है।

मंत्री के दस मिनट के दौरे के लिए पंडाल, कारपेट, भजन, जय-जयकार और मिठाई तक. इस व्यंग्य में एक बच्चे का मासूम सवाल लोकतंत्र में जनता की भूमिका और राजनीतिक चेतना की पूरी कहानी सामने रख देता है।