रिश्तों की याद
कभी किसी की मुस्कान, उसकी शरारत और छोटी-छोटी ज़िदें यादों में इस तरह बस जाती हैं कि मन बार-बार एक ही सवाल पूछता है—अब उसे मेरी याद नहीं आती क्या?

कभी किसी की मुस्कान, उसकी शरारत और छोटी-छोटी ज़िदें यादों में इस तरह बस जाती हैं कि मन बार-बार एक ही सवाल पूछता है—अब उसे मेरी याद नहीं आती क्या?