कविताएँ मेरी हथेली पर

यह कविता जीवन की हथेली पर उकेरी गई अनुभूतियों का चित्र है। माँ, पिता, प्रेम और समाज चारों मिलकर मनुष्य के अस्तित्व की रेखाएँ बनाते हैं। कविताएँ यहाँ केवल रचना नहीं, बल्कि पहचान और पूर्णता का प्रतीक हैं।

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